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कब तक इंतजार करु!

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  कब तक इंतजार करू शहर से बहुत दूर स्थित एक  छोटा -सा गांव "किशनपुर" !जो अब भी मुख्य सड़क से लगभग 5-6 किलोमीटर दूर स्थित है। पूर्णतः प्रकीर्ति  की गोद में बसी इस गांव में कुल मिलकर २०-३० मिट्टी के खपरैले घर होगें। चारों और हरी -हरी पेड़ ,पर्वते ,तलाव ,झरने तथा एक विशाल नदी था ,जिसमे प्रत्येक वर्ष भयंकर बाढ़ आया करता था।  सवेरा होते ही ,अंशुमाली की लालिमा तथा पक्षियों की चहचहाट हर इंशान को अपनी और आकर्षित कर ही लेता था। गांव के सामने एक बड़ा सा मैदान और किनारे में एक बरगद का पेड़ ,नीचे तलाव ,शाम में जब डूबते सूर्य की लालिमा युक्त प्रतिबिम्ब तालाब के जल में बनती तो प्रकिर्ति की सुंदरता में चार चाँद लग जाता।  उसी बरगद के नीचे  दीपक अपने पैंट के दोनों पॉकेट में कनौले भर कर "कित -कित "खेला करता था। जब कभी भी वह हार जाता तो दीपा उसे खेल से बाहर कर देती। कहती "बच्चे ,सामने बैठकर देख कैसे खेला जाता है।  ..... ए  तू मुझे खेलने नहीं देगी तो मैं तुम्हें "कनौले " नहीं दूँगा।  अरे कनौले लाया है ,अच्छा ,दो न ! मैं तुम्हें अपने साथ खेलने दूंगी। दीपा घिघियाने लगत...

"अति आधुनिक आज़ादी के दीवानें "

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"अति आधुनिक आज़ादी के  दीवानें " आज १५ अगस्त है , भारतीय स्वतंत्रा  दिवस ! छुट्टी का दिन, मैं कोई सरकारी कर्मचारी नहीं ,भारतीय सेना में नहीं  और न ही स्कूल का विद्यार्थी !प्राइवेट कंपनी में कार्यरत एक छोटा सा कर्मचारी ! हर साल की तरह बिना किसी कार्यकर्म में जाने की सूचना मागें बगैर हमें कार्यस्थल से छुट्टी मिल गयी, वैसे दिन भी रविबार का है।  कुछ दिन पहिले मैं फरीदाबाद में रहा करता था , तब हमारी कॉलोनी के द्वारा आयोजित स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में भाग लिया करता था। आज महामारी (Covid-19) के दौर में अतिआवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलना होता है और १४ अगस्त को ही वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के कारण मैं पूरा दिन घर पर ही था।  अपनी दैनिक किर्याकर्म के साथ दिन की शुरुवात के साथ कुछ एक विडिओ देखीं ,समाचार चैनल देखा फिर व्हाट्सप पर कुछ मित्रो को "Happy Independence Day " का रिप्लाई किया और नास्ते  के बाद विश्राम करने लगा।  लगभग ०१  बजे दोपहर  को पूर्ण विश्राम के बाद मैं जगा , चाय बनाया और चाय की कप के साथ मैंने सोचा खाली बैठे क्या क...

🌸 अधूरी उड़ान 🌸

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अधूरी उड़ान  एक छोटे से गाँव में एक किसान था, जो अपनी बगिया में एक मुर्गी पालता था। उस मुर्गी ने पाँच अंडे दिए। किसान रोज़ उन अंडों को देखता और सोचता, "कब ये प्यारे चूजे निकलेंगे? मैं उनकी देखभाल करूँगा, उन्हें बड़ा बनाऊँगा, उड़ना सिखाऊँगा!" एक दिन उसने देखा कि एक अंडे के अंदर से धीमे-धीमे आवाज़ आ रही है — चूजा अंदर से खोल तोड़ने की कोशिश कर रहा था। किसान को दया आई: "बेचारा, कितना मुश्किल हो रहा है! क्यों न मैं खोल तोड़ दूँ?" उसने अंडे को हल्के से तोड़ा, अपनी उँगलियों से दरारें बना दीं, और धीरे-धीरे चूजे को बाहर निकाला। चूजा निकला तो सही, लेकिन… वो बहुत कमजोर था। उसके पंख अधूरे थे, टाँगें ठीक से मजबूत नहीं हुई थीं, और उसकी सांस उखड़ी-उखड़ी थी। Pawan's creation! माँ मुर्गी ने किसान को दुखी होकर देखा और कहा: "तूने उसकी मदद की, पर उसपवन से उसका संघर्ष छीन लिया। खोल को खुद तोड़ते हुए जो ताक़त बनती है, वही उसे उड़ना सिखाती है।" कई हफ्तों तक बाकी चूजे बड़े हुए, दोड़े, फुदके, उड़ने की कोशिश करने लगे — मगर वह एक चूजा, जिसे किसान ने बाहर निकाला था, कमजो...

माँ की याद में

  माँ की याद में माँ, तू गई, पर दिल में बसी, तेरी हर बातें, हर सीखें, हमसे कभी न जुदा हुई। तेरी गोद का वो सुकून कहाँ, तेरी ममता की छाँव अब कहाँ? जो तूने सहा, जो तूने दिया, उसका कोई मोल न पाया। आज तेरी आत्मा को शांति मिले, हमारी दुआओं में तेरा नाम खिले। तेरे जाने का दुख भारी है, पर तेरा प्रेम, अमर हमारी धरोहर है। आसमान में तारे बन चमक रही, हमारी राहों को तू रोशन कर रही। माँ, तेरा आशीर्वाद सदा हमारे साथ, तेरी यादों में ही अब हमारा संसार।

आर डब्लू ए , यमुना एन्क्लेव पार्ट ३ एवं ४।

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आर डब्लू ए , यमुना एन्क्लेव पार्ट ३ एवं ४।  बदरपुर मेट्रो स्टेशन से ६ -७ किलोमीटर ,फरीदाबाद बाईपास नहर किनारें वसा एक छोटा -सा कॉलोनी है "यमुना एन्क्लेव पार्ट ३ एबं ४। ऐतिहासिक गांव तिलपत और मबई के मध्य में बसा ये कॉलोनी अपने आप में बेहद सौंदर्य ,सौहार्दपूर्ण एबं अनोखे सामाजिक प्रेम के लिए विख्यात है।  जहाँ ये कॉलोनी आधुनिक सुविधाओ से दूर कच्ची गलियों ,विजली के लिए लकड़ी के खम्भों ,सीवर लाइन जैसे बुनयादी सुविधाओं से वंचित है वहीँ यहाँ के वासी एक दिव्य सकारात्मक ऊर्जा से परिलिप्त ,प्रेमातुर होकर सामाजिक कार्य के लिए तत्पर रहते हैं ।  मैं किंगकर्तव्यबिमूढ़ हूँ कि कहाँ  से लिखना आरम्भ करूँ । चलिए मैं नगर निगम पार्षद श्री बिजेंद्र शर्मा जी से ही प्रारम्भ करता हूँ ,आपने नेता तो बहुत देखा होगा ,सुना होगा ,नेता जी सुनते ही एक चित्र मानसिक पटल पर बनती है ,खादी कुर्ता-पायजामा ,महगी गाड़ी ,बॉडीगॉर्ड इत्यादि लेकिन श्री बिजेंद्र शर्मा जी को लोअर ,टी-शर्ट में किसी भी गली के चौराहे पर सामाजिक कार्य की निगरानी करते, या फिर विकास के मुद्दों पर बात करते या  समाज की आम  लो...